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Saturday, April 25, 2020

पालघर संत हत्या पर एक कविता दोषियो का काला चिठा होगा सामने || सौरभ भारद्वाज

पालघर संत हत्या पर एक कविता दोषियो का काला चिठा होगा सामने || सौरभ भारद्वाज


Click To Subscribe https://goo.gl/wMZbX6 पालघर संत हत्या पर एक कविता दोषियो का काला चिठा होगा सामने। सौरभ भारद्वाज #Subscribe Us for Latest News & Updates ► http://www.fxnmedia.com/ ► Stay Connected with Us : SAURABH BHARDWAJ (Writer & Film Director) 1.Kishorganj,Ranchi,Jharkhand. 2.Varsowa village,Varsowa,Mumbai. अब ना मारो मुझे बचा लो रक्षक की पुकार रहा रक्षक का भी एक रक्षक था उसका भी दीदार रहा रुन्दन से कंठ छिल गए हैं नैनो से अश्रु धार बहा बहरे हो गए सभी हिंदू जब पालघर चित्कार रहा11। देशहित में, धर्महित में, उसने अपना घर छोड़ा था वो भी धर्म सैनिक था ,फिर क्यों दुष्टों ने घेरा था तड़प तड़प के आह निकलती, हाथों को उसने जोड़ा था निरपराध पर बरसी लाठी ,सर भी उसका फोड़ा था पाप किया पर धन्यवाद है, जिसने दृश्य का प्रसार किया बहरे हो गए थे सभी हिंदू जब पालघर चित्कार रहा।2। रक्षित को दंडित किया, गुरुर तेरा खंडित होगा जब सनातन की रक्षा में ,पूरा भारत पंडित होगा एक हाथ होगी रामायण, एक हाथ गंडित होगा खंड खंड विकृत होगा जब तू हमसे दंडित होगा अब सच करने की बारी है जो अब तक सपना रहा बहरे हो गए थे सब हिंदू जब पालघर चित्कार रहा इतिहास बताती है जब जब दुष्टों ने,साधू संत को मारा था कभी गान्डिव कभी परसा, कभी गोली उनका हत्यारा था मां दुर्गा भी अस्त्र उठाती, नारायण भी चक्र चलाते हनुमान ने गदा उठाया, शिवजी भी त्रिशूल चलाते अस्त्र-शस्त्र की जरूरत आती है जब दुष्टों का प्रहार रहा बहरे हो गए थे सभी हिंदू जब पालघर चित्कार रहा गूंज उठी एक कली गर्जना सत्ता के गलियारों में संत के हत्या पर निशब्द है चूर वासना के अंधियारो में जिनको अपनी मातृभूमि की खूनी आंचल की फिक्र होती उनके मुख से झूठा ही सही दुख की जिक्र जरूर होती आपकी चुप्पी में बरसों से भारत ये बर्बाद रहा बहरे हो गए सब हिंदू जब पालघर चित्कार रहा 80 कोटी का मानक मानव को फिर से जगाना जरूरी है कौन वजह संत हत्या की ये राज बताना जरूरी है जो भारत की संस्कृति पर सवाल उठाते आए हैं धर्म भ्रष्ट होकर एक ,नव पंथ बनाते आए हैं,, सृष्टि एक,एक धर्म सनातन फिर किसका प्रचार रहा बहरे हो गए थे सब हिंदू जब पालघर चित्कार रहा वो क्या हमें संभालेंगे ,जिनका भारत से कुछ नहीं नाता है कब क्या कैसे समझेंगे ,यह देश नहीं हमारी माता है पुत्र भला कैसे होगा जो आंचल रक्त रंजित करेगा रक्तधारा बह जाएगी ,जो झूठा मंडित करेगा चेतने का वक्त दिया था ,पर पाप तेरा लगातार रहा बहरे हो गए थे सब हिंदू ,जब पालघर चित्कार रहा अपने निर्णय से पहले ठहरा हूं ,देखूं तेरी नैनों में निर्णय का हक दिया बैठा हूं, भीम बाबा की पन्नों में इतना तो यकिन है मुझको, मौत की मौत लिखी होगी ना लिखी तो लिख देना, क्योंकि वह दृश्य तूने देखी होगी बस इतना ही कदम उठाना दिल्ली, इतना ही इंतजार रहा बहरे हो गए थे सब हिंदू, जब पालघर चित्कार रहा

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