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Saturday, April 18, 2020

कैसे आती है मौत जरा थोड़ी टाईम निकाल के जरुरु पड़े ,


  कैसे आती है मौत


  कुछ लोग मौत को जीवन का सबसे बड़ा सत्य मानते हैं,
 लेकिन हिन्दू दर्शन अनुसार यह सबसे बड़ा झूठ या भ्रम है
मौत से सभी डरते हैं ऐसा मानना गलत है। दरअसल लोगों को यह गहराई से
 अहसास ही नहीं है कि हम भी कभी न कभी मरेंगे

जब लोग किसी के दाह या दफन संस्कार में शामिल होकर शमशान या कब्रिस्तान जाते हैं
तभी उन्हें थोड़ा बहुत अहसास होता है कि हम भी लाइन में खड़े हैं। हालांकि बहुत से लोगों को, तो तब अहसास होता है


जब वे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे होते हैं। शरीर के प्रति लापरवाह लोगों को आप कितना ही समझाएं वे जब मौत निकट आती है तब पछताते हैं। आओ हम आपको बताते हैं कि आपकी मौत कब आपके दरवाजे पर दस्तक दे सकती है।



जब लोग किसी के दाह या दफन संस्कार में शामिल होकर शमशान या कब्रिस्तान जाते हैं
तभी उन्हें थोड़ा बहुत अहसास होता है कि हम भी लाइन में खड़े हैं। हालांकि बहुत से लोगों को, तो तब अहसास होता है


जब वे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे होते हैं। शरीर के प्रति लापरवाह लोगों को आप कितना ही समझाएं वे जब मौत निकट आती है तब पछताते हैं। आओ हम आपको बताते हैं कि आपकी मौत कब आपके दरवाजे पर दस्तक दे सकती है।


मृत्यु कैसी भी हो काल या अकाल, उसकी प्रक्रिया छह माह पूर्व ही शुरू हो जाती है।
 छह माह पहले ही मृत्यु को टाला जा सकता है, अंतिम तीन दिन पूर्व सिर्फ देवता या मनुष्य के पुण्य ही मृत्यु को टाल सकते हैं। यह याद रखना चाहिए कि मौत का अहसास व्यक्ति को छह माह पूर्व ही हो जाता है। विकसित होने में 9 माह, लेकिन मिटने में 6 माह। 3 माह कम







कुछ लोग मौत को जीवन का सबसे बड़ा सत्य मानते हैं, लेकिन हिन्दू दर्शन के अनुसार यह सबसे बड़ा झूठ या भ्रम है।
मौत से सभी डरते हैं ऐसा मानना ​​गलत है। दरअसल लोगों को यह गहराई से अहसास ही नहीं है कि हम भी कभी न कभी मरेंगे।
जब लोग किसी के दाह या दफन संस्कार में शामिल होते हुए शमशान या कब्रिस्तान जाते हैं तो उन्हें थोड़ा बहुत अहसास होता
है कि हम भी लाइन में खड़े होते हैं। हालांकि बहुत से लोगों को, तो तब अहसास होता है जब वे अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच झुल रहे होते हैं।
 शरीर के प्रति लापरवाह लोगों को आप कितनी ही समझेंगे वे जब मृत्यु निकट आते हैं तब पछताते हैं। आओ हम आपको बताते हैं कि आपकी मृत्यु जब आपके दरवाजे पर दस्तक दे सकती है।
 


मृत्यु कैसे भी हो काल या अकाल, उसकी प्रक्रिया छह महीने पूर्व ही शुरू हो जाती है। छह महीने पहले ही मृत्यु को टाला जा सकता है,
अंतिम तीन दिन पूर्व सिर्फ देवता या मनुष्य के पुण्य ही मृत्यु को टाल सकते हैं।
यह याद रखना चाहिए कि मृत्यु का अहसास व्यक्ति को छह महीने पूर्व ही हो जाता है।
विकसित होने में 9 महीने, लेकिन मिटने में 6 महीने। 3 महीने कम  जब मौत  आती है तो जो भी धरती पर प्राणी है उनको मौत आने से पहले आगाह कर जाती है ,


कैसे आती हैं मौत  .?

मौत जब आती है तो कोई किसी को बता के नहीं आती , और ना ही कभी सीमित टाइम पै आती है

इसका उस पर्णि  को  ही पहले ही ऐसाश होता है  की अब मेरा टाइम ख़त्म है अब मुझे  जाना है

बाकी इस संसार  में इस  पे कभी  बड़ी  बड़ी   रेसर्स हुई है मगर कोई अभी तक पता नहीं  कर पाया  है /

इस  संसार मैं  अगर आये  हो तो एक दिन जाना ही है |


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