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Wednesday, June 17, 2020

अचानक नहीं हुई हिंसक झड़प, बीते 42 दिनों से चल रहा था विवाद, जानें पूरा मामला, अचानक नहीं हुई हिंसक झड़प













नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिको के बीच हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में भारतीय सेना के 20 जवानों के शहीद होने की पुष्टि की है। वहीं चीन ने अपने सैनिकों की संख्या पर चुप्पी साध रखी है। आखिर ऐसा क्या हुआ अचानक कि जहां से धक्का मुक्की की खबर आती थी, वहां से हिंसक झड़प की खबर सामने आई है। आईए जानते हैं विस्तार से...
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भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे पीएलए के जवान
5 मई को पूर्वी लद्दाख में पंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे पर चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवान भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और हमारे जवानों से झड़प की। कुछ को हल्की चोटें आईं। 8 मई को पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान सहित करीब पांच और जगह दोनों देशों के जवान आमने सामने डट गए। 9 मई के दिन उत्तरी सिक्किम में नाथू ला में गश्त के दौरान दोनों देशों के जवानों में झड़प हुई। हाथापाई में कुछ सैनिक घायल हुए।
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गलवान घाटी में 100 टैंट लगा लिए थे चीन ने
12 मई को चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अपने हेलिकॉप्टर भेजे तो भारतीय सेना ने भी लेह एयरबेस पर लड़ाकू विमान सुखोई-30 एमकेआई का बेड़ा भेजा। इसके बाद 14 मई को सेटलाइट तस्वीरों ने चीनी घुसपैठ की हरकतों का खुलासा किया। चीन ने गलवान घाटी में करीब 100 टैंट लगा लिए थे। बंकर बन रहे थे। टैंक और गाडिय़ां खड़ी थीं। पंगोंग त्सो और डमचौक में भी टैंट लगे थे। मई का आखिरी सप्ताह में जवानों के आमने-सामने डट जाने से पैदा हुए तनाव को कम करने के लिए दोनों तरफ से बटालियन कमांडर और मेजर स्तर की वार्ताएं हुईं मगर तनाव बना रहा।
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6 जून को देशों में हुई लेफ्टीनेंट स्तर की वार्ता
सीमा विवाद को लेकर 6 जून को दोनों देशों में लेफ्टीनेंट स्तर की वार्ता हुई। यह वार्ता कुछ प्रभावी होती दिखी, लगा कि तनाव कम होगा, लेकिन 10 जून को पूर्वी लद्दाख में चीन जवानों के दो किलोमीटर पीछे हटने की खबर मीडिया में आई। इसे 6 जून की वार्ता का प्रभाव माना गया और तनाव खत्म होने की उम्मीद की जाने लगी।

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15 जून को गलवान में हुई हिंसक झड़प
वार्ता के बाद 15 जून को गलवान में दोनों देशों के जवानों में हिंसक झड़प हुई और भारत के एक कर्नल सहित करीब 20 जवान शहीद हो गए, चीन के भी 43 जवान मारे जाने की सूचना आई। और उसके बाद 16 जून को चीन की हरकत की सूचना सामने आने के बाद भारत ने नाराजगी जताई। कूटनीतिक प्रयास शुरू किए। 

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