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शुक्रवार, 8 मई 2020

वाराणसी में सप्तऋषि आरती को लेकर विवाद बाबा की आरती.. पूरे दिन सोशल मीडिया में सरगर्मी,ज्ञानवापी क्रासिंग पर सुरक्षा का घेरा बढ़ा


                        

खबर Up के वाराणसी, 08 मई -। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सप्तऋषि आरती को लेकर कथित गहराते विवाद के बीच लगातार दूसरे दिन शुक्रवार शाम को भी मंदिर प्रशासन ने नियमित अर्चकों से बाबा की सप्तऋषि आरती कराई। गुरूवार को भी नियमित अर्चकों ने ही बाबा भोले की आरती की थी। लेकिन कुछ आवांछनीय तत्वों की ओर से भ्रामक खबरें सोशल मीडिया पर फैलायी गई।


शुक्रवार को मंदिर के प्रधान अर्चक सत्य नारायण चौबे, नीरज कुमार पांडेय, टेक नारायण उपाध्याय, डॉ श्रीदेव, राजेश कुमार पाठक, संजय कुमार पांडेय, ओम प्रकाश मिश्र, पं.श्रीकांत मिश्र ने सहयोगी ब्राम्हणों के साथ मिलकर सप्त ऋषि आरती का पूजन संपन्न कराया। इस दौरान बाबा को दही दूध घी शहद से स्नान कराकर उनका भव्य श्रृंगार किया गया। श्रृंगार के पश्चात बाबा की आरती उतारी गई।

                   


मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि मंदिर के सभी विद्वान अर्चकों की देखरेख में आरती संपन्न कराई जा रही है। विश्वनाथ मंदिर की किसी भी परंपरा को न तो रोका जाएगा ना ही उसमें बदलाव किया जाएगा। परंपरा के निर्वहन के लिए जिस भी व्यवस्था की जरूरत पड़ेगी मंदिर प्रशासन उसे समय पूर्व तैयारी करके सम्पन्न कराएगा।



उधर, पूर्व महंत डा.कुलपति तिवारी और उनके परिवार के सदस्यों ने अपने-अपने घर ही सप्तर्षि आरती कर परंपरा का निर्वहन किया। विवाद को लेकर कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने पूर्व महंत के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और पूरे प्रकरण की जानकारी ली। आरोप है कि कांग्रेस के आह्वान पर लोगों ने काशी विश्वनाथ मंदिर के सप्तॠषि आरती के लिए परंपरागत अर्चकों को कथित रूप से रोके जाने पर सोशल मीडिया पर विरोध जताया।


और अपने घरों के बालकनी में पांच दीप जलाकर हर हर महादेव का उद्धघोष करके शासन प्रशासन को दंड देने व सुबुद्धि की प्रार्थना की। विवाद को लेकर पूरे दिन शहर में सोशल मीडिया में सरगर्मी बढ़ी रही। लोग पक्ष और विपक्ष में तर्क देते रहे।

                

बताते चलें, गुरूवार की शाम अर्चकों ने आरोप लगाया कि मंदिर परिसर स्थित कैलाश मंदिर का कुछ हिस्सा तोड़ने का विरोध करने के कारण उन्हें मंदिर में जाने से रोक दिया गया है। इस संबंध में मंदिर प्रशासन का पक्ष था कि अर्चकों ने आरती से इंकार कर दिया है। इसके कारण मंदिर प्रबंधन ने मंदिर के नियमित अर्चकों से बाबा की सप्तर्षि आरती कराई।


मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि मंदिर के अर्चकों ने स्वयं आरती करने से मना कर दिया। इसके बाद हम लोगों ने मंदिर के पुजारियों से आरती संपन्न कराई। मंदिर में आरती को लेकर छिड़े रार के बाद ज्ञानवापी पर सुरक्षा की चॉक चौबंद व्यवस्था की गई है। पुलिस अफसर अर्ध सैनिक बल के साथ गेट नंबर चार पर मुस्तैद नजर आये।

  

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