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शनिवार, 16 मई 2020

लाकडाऊन का जमकर उल्लंघन । मुंबई जिंदादिल लोगों का शहर है, संकट की घड़ी में भागने वालो के लिए यहां जगह नहीं है







प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा कि जो जहाँ है वहीं रहे। घर में रहें सुरक्षित रहें। लोगों ने लाकडाऊन का जमकर उल्लंघन किया। तीसरा लाकडाऊन शुरू हो गया है लेकिन आप सब नहीं मान रहे हो। आप लोग तो ऐसे उत्पात मचा रहे हैं गांव जाने के लिए कि जैसे गांव पहुंचते ही सभी प्रकार की आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक समस्यायें समाप्त हो जायेंगी। मैं भी उसी प्रदेश, उसी उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हूं और मैं अच्छे से जानता हूँ कि वहां पर कौन, कितने बडे जमींदार परिवार से संबंध रखता है और आजीविका के कितने साधन उपलब्ध है।

मुंबई में कोई भूखा नहीं सोता, यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है, यह यथार्थ है । जिस प्रकार से तमाम राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठन, दिन रात, पिछले दो महीनों से सबको भोजन, पानी दे रहे हैं, वह केवल और केवल मुंबई में संभव है और आप उसी मुंबई को ठुकरा कर गांव जाने के लिए उत्पात/ नंगई पर उतारू हो। थोडी सा प्राकृतिक संकट आया और आप मुंबई छोड़ कर भागने पर आमादा हो गए और कौन सी जमींदारी छोड़ कर आये हो उत्तर प्रदेश में??? अधिकांश लोगों के पास एक एकड़ ज़मीन भी तो नहीं होगी शायद एक आदमी के हिस्से में??  वहां कौन खिलायेगा और कितने दिन खिलायेगा?? वहां मुफ्त में चार दिन भी नहीं खा पाओगे। कितने बडे-बडे कारखाने, मिल, कंपनियां, फैक्टरियां हैं वहां, मुझे सब पता है।



नब्बे प्रतिशत घरों की तो यह हालत है कि किसी प्रयोजन या कार्यक्रम में जब पूरा परिवार इकट्ठा हो जाता है तो सोने के खटिया भी कम पड जाती है और तुम वहां जाकर झंडा गाडने का सपना देख रहे हो। चार दिन से ज्यादा बिना पैसे के, वहां जी नहीं पाओगे। वहां की गर्मी सर्दी बरसात की उमस ज्यादा दिन नहीं झेल पावोगे। कायदे से, नियंत्रित ढंग से हम सब रहे होते तो, यह बीमारी अब तक समाप्त हो चुकी होती। लेकिन आप सबने यहां भी संक्रमण फैलाया और अब उत्तर प्रदेश जाकर वहां भी फैलाओगे। वहां पहुंचने के बाद 14 दिन कोरेनटाईन में रहने का प्रबंध हो चुका है। दुखद है कुछ लोग साईकिल, मोटर साईकिल, ट्रक, मालगाड़ी में छुपकर मुम्बई से उत्तर प्रदेश पहुँच चुके है। इनमें से कुछ संक्रमित या बीमार भी हो सकते है।

एक बात आज मुझे खुलकर कहनी है कि राज ठाकरे सच कहते थे कि तुम परप्रांतीय हो। आज तुमने सच सिद्ध कर दिया कि तुम केवल पैसा कमाने की लालच में मुंबई आये थे। आपको मुंबई की मिट्टी से, मुंबई से कोई लगाव नही। आप सबको जरा सा भी अपनापन नहीं मुंबई की धरती से, वह धरती जिसने तुम्हारे जैसे मौकापरस्त लोगों को अब तक पाला पोसा। यह मुम्बई के साथ छल कर रहो हो।



अब आप लोग ये भी रो रहे हो कि सरकार गांव जाने के लिए 740 रू रेल टिकट का भाडा ले रही है। तो इतने वर्ष मुंबई में रहकर क्या पराक्रम किया तुमने कि रेल टिकट भी नहीं खरीद पा रहे हो? खैर सरकार अब आपसे किराया भी नहीं लेगी। 10 दिन और इन्तजार कीजिए- आप सब अपने गाँव पहुँचने लगोगे। जाओ, लेकिन याद रखना कि जरा सा भी स्वाभिमान, गैरत और आत्मसम्मान हो तो वापस मत आना क्योंकि मुंबई जिंदादिल लोगों का शहर है, संकट की घड़ी में भागने वालो के लिए यहां जगह नहीं है। मुझे भी अपनी मातृभूमि उत्तर प्रदेश से बहुत लगाव है लेकिन कर्मभूमि भी बहुत प्यारी है। हम मुम्बई में ही रहेंगे और कोरोना महामारी पर विजय प्राप्त करेंगे। 

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